BSE लिस्‍टेड कंपनियों के M-cap ने बनाया आज नया रिकॉर्ड, बढ़कर हुआ 195.21 लाख करोड़ रुपये

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M-cap of BSE-listed companies zoom to fresh record high of over Rs 195.21 lakh cr

नई दिल्‍ली। बीएसई पर लिस्‍टेड सभी कंपनियों का बाजार पूंजीकरण (market capitalisation) शुक्रवार को शुरुआती कारोबार के दौरान बढ़कर एक नई ऊंचाई पर पहुंच गया। दो दिनों की गिरावट के बाद शुक्रवार को एक बार फ‍िर बाजारों में जोरदार तेजी रही जिसके कारण बीएसई पर लिस्‍टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप बढ़कर 195.21 लाख करोड़ रुपये हो गया।

इक्विटी बाजार में तेजी आने से शुक्रवार को बीएसई पर लिस्‍टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप शुरुआती कारोबार में बढ़कर 1,95,21,653.40 रुपये हो गया। शुक्रवार को बीएसई सेंसेक्‍स 471.31 अंक के उछाल के साथ 48,564.63 अंक की नई ऊंचाई पर पहुंचने में सफल रहा। पिछले साल, सेंसेक्‍स ने 15.7 प्रतिशत वृद्धि हासिल की। शेयर बाजारों में इस तेजी की वजह से 2020 में इक्विटी निवेशकों की संपत्ति में 32.49 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हुआ है।

मजबूत वैश्विक संकेतों से 400 अंक उछला सेंसेक्स, नए शिखर पर निफ्टी

वैश्विक बाजारों से मिले मजबूत संकेतों से भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार को आरंभिक कारोबार के दौरान फिर गुलजार रहा। सेंसेक्स 400 अंकों से ज्यादा की छलांग लगाकर 48500 के ऊपर चला गया जबकि निफ्टी फिर नए शिखर को छुआ। निफ्टी रिकॉर्ड उंचाई पर खुलने के बाद 14,259 तक चढ़ा।

सेंसेक्स सुबह 9.27 बजे पिछले सत्र से 334.81 अंकों यानी 0.70 फीसदी की बढ़त के साथ 48,428.13 पर कारोबार कर रहा था जबकि निफ्टी पिछले सत्र से 106.45 अंकों यानी 0.75 फीसदी की बढ़त के साथ 14,243.80 पर बना हुआ था।

बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) के 30 शेयरों पर आधारित प्रमुख संवेदी सूचकांक सेंसेक्स पिछले सत्र से 371.59 अंकों की तेजी के साथ 48,464.91 पर खुला और 48,503.71 तक उछला जबकि इस दौरान सेंसेक्स का निचला स्तर 48,365.58 रहा।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) के 50 शेयरों पर आधारित प्रमुख संवेदी सूचकांक निफ्टी पिछले सत्र से 121.05 अंकों की तेजी के साथ 14,258.40 पर खुला और 14,259.15 तक चढ़ा जबकि इस दौरान निफ्टी का निचला स्तर 14,221.65 रहा।

एशिया के अन्य बाजारों से मिले मजबूत संकतों से देश के शेयर बाजार में फिर तेजी लौटी है। जानकार बताते हैं कि निवेशकों में तेजी का रुझान है क्योंकि उनकी नजर अब कोरोना वायरस के बढ़ते मामले और अमेरिका में राजनीतिक अस्थिरता के बजाय आगे दुनियाभर में आर्थिक गतिविधियों में संभावित सुधार पर टिकी हुई है।





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