कर्ज वसूली पर रोक छह महीने के लिये बढ़ाई जाए, निर्मला सीतारमण ने की मांग

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Photo:PTI

कर्ज वसूली पर रोक छह महीने के लिये बढ़ाई जाए, गरीब देशों के लिए निर्मला सीतारमण ने की मांग

नयी दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कोविड-19 संकट के मद्देनजर गरीब देशों को कर्ज की किस्ते चुकाने की मोहलत दिए जाने की पहल को छह महीने बढ़ाकर दिसंबर 2021 किये जाने की वकालत की है। विश्वबैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) ने पिछले साल अप्रैल में जी-20 देशों से किस्त वसूली निलंबन पहल (डीएसएसआई) शुरू करने को कहा था। डीएसआई का मकसद गरीब देशों की मदद करना है ताकि वे महामारी की रोकथाम और गरीब तथा करोड़ों वंचित तबकों के जीवन और आजीविका की सुरक्षा के लिये अपने संसाधनों के उपायोग पर ध्यान दे सके। 

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यह पहल एक मई, 2020 से प्रभाव में आयी और 40 से अधिक पात्र देशों को करीब 5 अरब डॉलर की राहत दी गयी। जी20 ने निजी कर्जदाताओं से भी इस पहल में शामिल होने का आह्वान किया। निलंबन अवधि 31 दिसंबर, 2020 को समाप्त होनी थी लेकिन इसे बढ़ाकर जून 2021 कर दिया गया। वित्त मंत्रालय ने बुधवार को एक बयान में कहा कि इटली की अध्यक्षता में जी-20 के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरों की दूसरी बैठक में भाग लेते हुए सीतारमण ने मजबूत, टिकाऊ, संतुलित और समावेशी वृद्धि को पटरी पर लाने के लिये वैश्विक चुनौतियों से निपटने को लेकर नीतिगत उपायों पर चर्चा की। 

बयान के अनुसार, ‘‘निम्न आय वाले गरीब देशों की सहयता के लिये वित्त मंत्री ने ऋण सेवा निलंबन पहल छह महीने बढ़ाकर दिसंबर 2021 करने की वकालत की।’’ बैठक में सर्वाधिक गरीब अर्थव्यवस्थाओं की वित्तीय जरूरतों को समर्थन देने के अलावा जी-20 सदस्य देशों ने अंतरराष्ट्रीय कराधान एजेंडा, महामारी संबंधित वित्तीय नियमन से जुड़े मसलों तथा हरित उपायों को बढ़ावा देने के मामले में प्रगति पर भी चर्चा की। जलवायु परिवर्तन पर जी-20 में चर्चा का जिक्र करते हुए वित्त मंत्री ने जलवायु वित्त और प्रौद्योगिकी स्थानांतरण पर पेरिस समझौते के तहत जतायी गयी प्रतिबद्धताओं की प्रगति की जरूरत पर बल दिया। 

उन्होंने सुझाव दिया कि निम्न कार्बन उत्सर्जन के साथ हरित उपायों के लिये अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों से कोष प्रवाह के साथ खासकर विकासशील और निम्न आय वाले देशों के लिये चुनौतियों से निपटने तथा वृद्धि को पटरी पर लाने के लिये तत्काल ध्यान देने की जरूरत है। सीतारमण ने जी-20 देशों से टीके की समान रूप से और व्यापक स्तर पर वितरण सुनिश्चत करने का भी आग्रह किया। उन्होंने यह भी कहा कि भारत तेजी से टीकाकरण का सबसे बड़ा अभियान चला रहा है और खासकर महामारी के दौरान टीके तथा चिकित्सा उत्पादों का एक प्रमुख वैश्विक उत्पादक बना है। 

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सीतारमण ने कहा कि भारत में टीकाकरण अभियान में अबतक 8.7 करोड़ से अधिक नागरिकों को टीके की खुराक उपलब्ध करायी गयी है। साथ ही ने 84 देशों को 6.4 करोड़ से अधिक खुराक की आपूर्ति की गयी है। इनमें से एक करोड़ खुराक अनुदान के रूप में है। 

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